Thursday, March 11, 2010

संजय जोशी के सवाल पर भाजपा में बवाल

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नई दिल्ली। भाजपा की नयी कार्यकारिणी की घोषणा होनेवाली है. उम्मीद है कि अगले एक दो दिनों में भाजपा की नयी कार्यकारिणी की घोषणा हो जाएगी लेकिन संजय जोशी के नाम को लेकर अभी भी भाजपा में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है. नितिन गडकरी हर हाल में उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाकर रखना चाहते हैं जबकि आडवाणी और उनके करीबी संजय जोशी की इन्ट्री नहीं होने देना चाहते.

संजय जोशी के सवाल पर आडवाणी और नितिन गडकरी आमने सामने हैं. नितिन गडकरी की पूरी टीम फाइनल हो गयी है लेकिन अनुशासन का ऐसा डर कि भाजपा कार्यालय के अपने दफ्तरों में बैठकर खबर बांटने का कारोबार करनेवाले नेता इस बार खबरों का कोई प्रसाद नहीं बांट रहे हैं. किसका नाम फाइनल है और कौन भाजपा की नयी टीम का हिस्सा होगा, कुछ भी लीक नहीं किया जा रहा है लेकिन संजय जोशी का सवाल आया तो दोनों ओर से तरवारें खिंच गयीं.

आडवाणी और उनके समर्थक संजय जोशी को नहीं आने देना चाहते. सेक्स सीडी काण्ड में फंसे संजय जोशी को लेकर आडवाणी और उनके समर्थक मानते हैं कि अगर वे दोबारा से पार्टी में पदाधिकारी के रूप में वापस लौटते हैं तो उससे पार्टी की छवि को नुकसान होगा. जबकि हकीकत यह है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं चाहते कि संजय जोशी को केन्द्रीय टीम में कोई जगह मिले, नहीं तो उन्हें सीधी चुनौती मिल सकती है. लेकिन मूलत: नागपुर के संजय जोशी नितिन गडकरी के राजनीतिक आका रहे हैं और अध्यक्ष बने गडकरी संजय जोशी को कम से कम उपाध्यक्ष तो बनाना ही चाहते हैं. सोमवार को दिल्ली में नानाजी देशमुख की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संघ और भाजपा के कई शीर्ष नेता उपस्थित थे. इस मौके पर संजय जोशी भी अपने लाव लश्कर के साथ मौजूद थे. लेकिन जैसा कि उनका स्वभाव है पूरे समय वे पांडाल के बाहर ही नजर आये.

बहरहाल, अब नयी कार्यकारिणी की घोषणा के वक्त ही पता चलेगा कि संजय जोशी का पलड़ा िकस ओर झुकता है. उनके शिष्य उन्हें अपनी टीम में शामिल करने में सफल होते हैं या फिर विरोधी बाहर बैठाने में कामयाब हो पाते हैं. संजय जोशी के लिए उनके कुछ नजदीकी लोगों ने संगठन महासचिव बनाने का भी प्रस्ताव किया था. शायद उन्हें उम्मीद थी कि ज्यादा की मांग करेंगे तो थोड़ा तो मिल ही जाएगा. इसलिए अब नयी टीम की घोषणा के इंतजार से ही काई साफ होगी और पता चलेगा कि आखिर घमासान ने क्या रुख अख्तियार किया.

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