Thursday, March 11, 2010

बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में

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image सोनिया को दिया गया सारा श्रेय, जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता

बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?

विरोधियों का डर कहें या एहतियाती कदम। लोकसभा में राज्यसभा जैसा मंजर न दोहराए, सो पेन, पेंसिल, पिन, पेपरवेट जैसे सामान हटा लिए गए। अब सवाल वही उठ रहा, लोकसभा में बिल कब आएगा। पर सरकार ने तो जितना करना था, कर लिया। आधा सफर तय कर ही समूची महिलाओं का दिल जीत लिया। तभी तो संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने एलान किया। बजट सत्र के मध्य अवकाश से पहले ही बिल लाएंगे। यानी सोलह मार्च से पहले। पर राजनीति का पुछल्ला जोड़ दिया। बोले- 'लोकसभा में बिल लाने से पहले सभी दलों से बात करेंगे।' अब सरकार की नीयत का अंदाजा आप लगा लें। हो न हो, एजंडे में बिल को शामिल कर सरकार अपना इरादा दिखाएगी। फिर विरोधी खम ठोकेंगे। तो आम सहमति का फच्चर फंसेगा। वैसे भी लोकसभा में जोखिम उठाए बिना बिल पास कराना संभव नहीं। सो सरकार फिलहाल जोखिम क्यों उठाए। चुनाव में अभी चार साल बाकी है। फिलहाल कांग्रेस आधा सफर तय करने की थकान मिटाएगी। गर चुनाव कराने की ठान ली तो लोकसभा में भी बिल पारित करा क्रांति का आगाज करेगी।

इसलिए कांग्रेस अब तेल और तेल की धार देखेगी। भले बीजेपी ने बिल पास कराने के लिए ऐसा गड्ढा खोदा, जिसमें कांग्रेस फंस जाए। यों कांग्रेस फंसी जरूर, पर कहते हैं ना, जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद भी गिरता है। बीजेपी भी बुरी तरह फंस गई है। बवाली सांसदों को सदन से बाहर करने का आइडिया अरुण जेटली का था। पहले दिन तो सरकार ने नहीं माना पर सोनिया गांधी ने बिल पास कराने को वीटो लगा दिया तो रणनीतिकारों ने ज्यादा दिमागी घोड़े नहीं दौड़ाए। अलबत्ता जेतली फार्मूला ही अपना लिया। सो पहले सांसद निलंबित किए गए, फिर भी न हटे, तो मार्शल का प्रयोग सबने देखा। अब बवाली सांसद निलंबन के बाद भी न हटे। तो मार्शल के सिवा कोई चारा भी नहीं था। बीजेपी बिना बहस बिल पास करने को राजी नहीं थी। सो बल प्रयोग हुआ। पर तब न बीजेपी ने चूं किया, न लेफ्टियों ने चपड़। अलबत्ता बिल पास होने की स्टेज पर आया। तो पीएम ने एडवांस में धन्यवाद देना शुरू किया। पर तभी लेफ्टिए सीताराम येचुरी खड़े हुए और अलग से मार्शल व अन्य स्टाफ को धन्यवाद दिलाया। अब मार्शल इस्तेमाल की चौतरफा आलोचना हुई। एनडीए फूट के कगार पर आ खड़ा हुआ।

संयोजक शरद यादव ने तो एनडीए भंग करने की मांग कर दी। सुषमा स्वराज को खरी-खरी सुनाने में संकोच नहीं किया। कहा, बिल के विरोध के लिए बीजेपी से समर्थन नहीं मांगा था। पर एनडीए में होने के नाते विपक्ष से इतनी उम्मीद थी कि जब सांसदों को मार्शल उठाकर फेंक रहे थे। तब विपक्ष आवाज उठाता। पर दुख इस बात का विपक्ष मूक-दर्शक बनकर खड़ा रहा। शरद और जेडीयू के राजीव रंजन लल्लन ने साफ कह दिया, अब एनडीए का कोई औचित्य नहीं। एनडीए का नए सिरे से गठन होना चाहिए। अब बीजेपी को काटो, तो खून नहीं। सो जेतली हों या येचुरी, अब मार्शल प्रयोग को नाजायज ठहरा रहे। यानी जब दिया रंज बुतों ने, तो खुदा याद आया। बुधवार को राज्यसभा शुरू हुई। तो सबसे पहले लालूवादियों-मुलायमवादियों ने विरोध दर्ज कराया। जब तक निलंबित सांसदों को वापस नहीं बुलाया जाता, सदन की कार्यवाही का बॉयकाट करेंगे। बस फिर क्या था, मौका देख जेतली ने भी निलंबन वापस करने की मांग कर दी। मार्शल के इस्तेमाल को गलत परंपरा बताया। बीजेपी अपनी ही चाल में फंस गई। सरकार ने भी दो-टूक मंशा जता दी। अगर निलंबित सांसद माफी मांगें, तो निलंबन वापसी पर विचार संभव। लेकिन निलंबित कमाल अख्तर और एजाज अली ने खम ठोक दिया। भले मेंबरी क्यों न चली जाए, माफी नहीं मांगेंगे। यानी अब सरकार को हंगामे में ही फायदा दिख रहा। हंगामा चलता रहा, तो वित्त विधेयक में भी अड़चन नहीं आएगी।

वैसे भी महिला बिल के जरिए कांग्रेस ने विपक्षी एकजुटता में खटास तो पैदा कर ही दी। ऊपर से लालू-मुलायम ने लोकसभा में बिल पर बलवे को कमर कस ली। बुधवार को लालू ने तो स्पीकर मीरा कुमार को ही हटाने की मांग की। खम ठोका, सरकार मार्शल बुलाए और हमें सदन से बाहर करके दिखाए। इतना ही नहीं, चुनौतीपूर्ण लहजे में बोले- 'देखते हैं सरकार के पास कितने मार्शल।' अब चाहे जो भी हो, सरकार कम से कम लालू-मुलायम-शरद की तिकड़ी पर मार्शल इस्तेमाल नहीं करेगी। यादवी तिकड़ी पर मार्शल इस्तेमाल का मतलब, खोए जनाधार वाले लालू-मुलायम को जिंदा करना। शरद भी अब अलग-थलग पड़ते जा रहे। नीतिश कुमार ने महिला बिल का साथ दिया। तो राज्यसभा में जद-यू के पांच वोट समर्थन में पड़े। लोकसभा में क्या होगा, यह तो बाद की बात। पर महिला बिल ने मंजिल तक पहुंचने से पहले ही विपक्षी कुनबे में दरार डाल दी।

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