राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है भ्रष्टाचार
हरिद्वार। सुरक्षा की समस्याओं के लिए प्रत्येक पहलुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार का विकराल रूप राष्ट्रीय सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा है, जिसे दूर करने करने के लिए सरकार को ठोस उपाय करने होंगे, जिसे दूर करने के लिए गैर सरकारी संगठनों की भूमिका बड़ा योगदान दे सकती है। उक्त विचार रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत भट्टाचार्य ने फोरम फोर इंटिग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी (फिन्स) द्वारा भारत माता मन्दिर में आयोजित राष्ट्र रक्षा सम्मेलन बोलते हुए व्यक्त किये।
आज पहले और दूसरे सत्र में देशभर से आये प्रतिनिधियों को स्वामी नरेन्द्रानंद, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा आडवाणी, पूर्व रक्षा सचिव योगेन्द्र नारायण, आई.बी. के पूर्व निदेशक अजीत डोवाल, पूर्व आई.जी. (जम्मू-कश्मीर) पी.सी. डोगरा, आर.एस.एस. के पूर्व सरसंघचालक के.सी. सुदर्शन, रिटायर्ड जस्टिस बी.एस. कोकजे, अशोक साहू, राजखोवा, श्रीमती ज्योथनपारी, पी.सी. डोगरा, डॉ. प्रो. नाहिद सेख, डॉ. दारक्षण, डॉ. श्रीमती विजेन्द्र, लै. कर्नल (सेवा निवृत्त) लक्ष्मी, बिग्रेडियर कुलदीप सिंह, श्री जसवोलिया व श्री समनउल्ला ने सम्बोधित किया।
वक्ताओं ने जम्मू-कश्मीर विषय पर सरकार की नीतियों की खामियां गिनाई। वक्ताओं ने कहा कि आतंरिक सुरक्षा को रोकना उतना ही मुश्किल है जिस प्रकार गंगा की अविरल धारा को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे का एक कारण नहीं है अपितु अनेक कारण हैं जिसमें भ्रष्टाचार, जनसंख्या, भाषा, सम्मान और सजा प्रणाली मुख्य कारण है। उन्होंने इन कारकों पर अंकुश लगाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। भ्रष्टाचार पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि भ्रष्टाचार को खत्म करना तो मुश्किल है लेकिन अगर प्रयास किया जाये तो इसे कम अवश्य किया जा सकता है जिसके लिए जनता को जागरूक रहना जरूरी है। वक्ताओं ने बढ़ती जनसंख्या को सीमित साधनों पर भारी बताते हुए कहा कि जैसा कि अनुमान है कि 2052 तक भारत की जनसंख्या 118 करोड़ से बढ़कर ठीक दो गुना हो जायेगी। जनसंख्या बढ़ेगी तो आपूर्ति की मांग भी बढ़ जायेगी और उद्योग बढ़ेंगे, तो तय है कि महंगाई भी बढ़ती जायेगी। वक्ताओं ने संसद हमले के आतंकी अफजल गुरू की ओर इशारा करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने के बावजूद राजनीतिक संरक्षण के चलते आज तक उसे फांसी नहीं दी जा सकी। वक्ताओं का कहना था कि दुनिया में भारत जैसे देश से बेहतर कोई अन्य नहीं है लेकिन एप्लीकेशन की कमी की बड़ी समस्या है।
वक्ताओं ने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी घुटना टेक नीति के कारण आतंकवाद को संरक्षण मिल रहा है। वक्ताओं ने प्रचण्ड हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक सरकार की दण्ड प्रक्रिया कमजोर रहेगी तब तक आतंकवाद पर लगाम लगाना असम्भव है। तालियों की गड़गड़ाहट के मध्य वक्ताओं ने यह भी कहा कि पंथ निरपेक्षता की छाप हमारे दिलों पर हावी है इसलिए हम चींटी भी नहीं मारना चाहते। किन्तु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अन्याय सहना अन्याय करने से भी अधिक पाप है। हम शांति के पक्षधर हैं किन्तु भारत की अस्मिता पर कोई निगाह डालता है तो हमें ईंट का जबाव पत्थर से देना होगा। हम अपनी आत्मिक शक्ति को पहचानें। हम सब में एक ही आत्मा है किन्तु राष्ट्र का चिन्तन एवं राष्ट्र का स्वाभिमान हमारे लिए सर्वोपरि है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिका आतंकवाद को संरक्षण दे रहा है। हम कबूतर उड़ाते हैं तथा शांति की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, यह कायरता का द्योतक है। हमारे जवानों को मनोबल गिरता है। आतंकवादियों को फांसी देने में विलम्ब से भी स्थिति बिगड़ रही है।
वक्ताओं ने कहा कि हमारी आंतरिक सुरक्षा और बाह्य सुरक्षा एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर है। इनको अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान के प्रमुख लोग यही बोलते हैं कि भारत ने हमारा बंगलादेश छिना है, हम कश्मीर लेकर रहेंगे। हमारे कुछ लोग यह कहते हैं कि पाकिस्तान का मजबूत होना भारत के हित में है परन्तु मेरी राय में यह गलत है, पाकिस्तान चाहे कमजोर हो, चाहे महबूत हो, उसको आप चाहे जितनी भी सुविधायें दें, उससे हमारे देश का लाभ नहीं होगा। अब पाकिस्तान के साथ चीन, अमेरिका की सामरिक मद्द भी जुड़ गयी है। पहले भारत और पाकिस्तान की सैनिक शक्ति का अनुपात 1 के मुकाबले 1:8 था जो अब भारत की शक्ति घटकर उनके मुकाबले 1:3 ही रह गयी है। इसलिए हमें ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जिससे अमेरिका की सैनिक शक्ति पाकिस्तान को बड़ी मात्रा में प्राप्त न हो। आतंकवाद पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब आतंकवाद अनेक शहरों में घुस गया है इसलिए समय आ गया है कि भारत अपने नोजवानों को अनिवार्य रूप से सैन्य शिक्षण देना प्रारम्भ करें। साथ ही भारत को कश्मीर में अपने देश के नागरिकों को भूमि खरीदने के अधिकार अवश्य देने चाहिए। आतंकवाद को रोकने के लिए ये दोनों बिन्दु परम आवश्यक हैं।


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